लॉकडाउन की वजह से लोग अपने ही घरों में कैद हैं। जो लोग कल तक चाय का कप धोने के लिए भी कामवाली बाई पर निर्भर रहते थे वे आज झाड़ू-पोंछा लगाने से लेकर खाना बना रहे हैं और बर्तन भी साफ कर रहे हैं। इस बात में कोई संदेह नहीं है कि कोरोना वायरस ने लोगों को आत्मनिर्भर बना दिया है। अब सवाल कोरोना वायरस और लॉकडाउन के बाद की जिंदगी का है। आइए समझते हैं कि कोरोना के बाद लोगों की जिंदगी कैसी होगी?
1. साफ-सफाई- कोरोना महामारी फैलने के बाद हमें साफ-सफाई की अहमियत समझ में आई है। मेट्रो की सीढ़ियों पर हाथ रखकर चलना, बालकनी की रेलिंग को छूना, लिफ्ट में एक कोने में जाकर टेक लेना, नाखून जबाना, नाक में उंगली करना जैसी आदतें हमारी दिनचर्या में शामिल थी जो अब धीरे-धीरे खत्म हो रही हैं। बैचलर्स को लेकर कहा जाता है कि वे साफ-सफाई से नहीं रहते, लेकिन कोरोना महामारी ने उन्हें भी बदल दिया है।
2. आत्म निर्भरता- बचपन से ही हमें मां-बाप से सीख मिलती है कि बेटा आत्म निर्भर बनो। लड़का हो या लड़की उसे घर-गृहस्थी का काम तो आना ही चाहिए, हालांकि कई लोग इन सब बातों को नहीं मानते। ऐसे लोग फिर होटल, टिफिन या फिर ऑनलाइन खाना डिलिवर करने वाली कंपनियों पर निर्भर रहते हैं, लेकिन लॉकडाउन ने यह बता दिया कि गृहस्थी का काम सीखना कितना जरूरी है। लॉकडाउन में सबसे अधिक परेशानी ऐसे लोगों को ही हो रही है।
3. जंक फूड से तौबा- सोशल मीडिया पर आपको तमाम ऐसे पोस्ट मिल जाएंगे जिनमें लिखा हुआ मिल जाएगा कि आपुन को समोसा मांगता है, आपुन को मोमोज मांगता है और आपुन को गोलगप्पे मांगता है। डॉक्टर्स ने हमेशा से जूंक और फास्ट फूड खाने से मना किया है। यह बात लॉकडाउन में साबित भी हो गई कि जंक फूड नहीं खाने से कोई बीमार नहीं पड़ता, बल्कि खाने के बाद बीमार जरूर हो सकता है। उम्मीद यही है कि लॉकडाउन खुलने के बाद फास्ट फूड से लोगों को कुछ खास लगाव नहीं रहेगा।
4. परिवार से लगाव- लॉकडाउन और कोरोना ने लोगों के पारिवारिक रिश्ते को मजबूत किया है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है। जो लोग कल तक परिवार से दूर भाग रहे थे उन्हें भी आज परिवार की याद आ रही है। लॉकडाउन की वजह से लोगों को अपने बच्चों और परिवार के साथ वक्त बिताने का मौका मिला है जिसका सुखद परिणाम भविष्य में देखने को मिलेगा। कोरोना खत्म होने के बाद लोगों के पारिवारिक रिश्तों में मजबूती देखने को मिलेगी।
5. भीड़-भाड़ से दूरी- लॉकडाउन के बाद इसकी पूरी संभावना है कि लोग भीड़-भाड़ वाले इलाके में जाने से ठीक उसी तरह परहेज करेंगे जिस तरह लॉकडाउन में कर रहे हैं। बाजार, मॉल और मेले में भी लोग जाएंगे लेकिन एक-दूसरे से एक तय दूरी का जरूर ख्याल रखेंगे और वैसे भी भीड़-भाड़ वाले इलाके से दूर रहना कोई बुरी बात नहीं है।
6. शॉपिंग खरीदारी में कटौती- कोरोना महामारी ने यह बात साबित कर दिया है कि इंसान फिजूलखर्जी बहुत ज्यादा करता है। ऐसा नहीं है कि लॉकडाउन में लोगों के खर्चे नहीं हो रहे हैं लेकिन कोरोना ने अनावश्यक खरीदारी पर लगाम जरूर लगा दिया है। इसे सीधे शब्दों में कहें तो पिछले दो महीने में शायद ही किसी ने नए कपड़े खरीदे होंगे। एक बात और ध्यान देने वाली है कि जब हम किसी शॉपिंग मॉल में जाते हैं तो हम उन चीजों को भी खरीद लेते हैं जिनकी हमें कुछ खास जरूरत नहीं होती है। ऐसे में हमारा महीने का खर्च बढ़ जाता है लेकिन लॉकडाउन में इस पर लगाम लगा हुआ है।